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डिजिटल मीडिया: नए भारत का मजबूत स्तंभ और पत्रकारों के अधिकारों की सुरक्षा

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डिजिटल मीडिया: नए भारत का मजबूत स्तंभ और पत्रकारों के अधिकारों की सुरक्षा

नई दिल्ली।

वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज।

रिपोर्ट बुध्देश मणि पाण्डेय जिला प्रभारी

भारत सरकार ने डिजिटल मीडिया को पूर्ण मान्यता प्रदान कर इसे प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के समकक्ष अधिकार और महत्व प्रदान किया है। यह कदम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने और पत्रकारों को उनके अधिकारों की ताकत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

डिजिटल मीडिया के पत्रकारों के अधिकार:

1. मान्यता:

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने डिजिटल मीडिया को कानूनी मान्यता दी है।

डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म RNI और सूचना मंत्रालय से पंजीकरण कराकर प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की तरह कार्य कर सकते हैं।

2. समान अधिकार:

डिजिटल मीडिया के पत्रकारों को सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लेने और रिपोर्टिंग का अधिकार है।

किसी भी सरकारी अधिकारी या पुलिस विभाग द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार करना कानून का उल्लंघन है।

3. कानूनी संरक्षण:

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a):
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत डिजिटल मीडिया पत्रकारों को अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है।

आईटी अधिनियम, 2000:
डिजिटल मीडिया के माध्यम से प्रकाशित जानकारी को संरक्षित किया गया है।

डिजिटल मीडिया का महत्व और सरकारी दृष्टिकोण:

1. डिजिटल मीडिया को मान्यता:

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने डिजिटल मीडिया को औपचारिक रूप से मान्यता दी है और मंत्रालय की वेबसाइट पर इसे स्थान दिया गया है।

2. सरकार की भूमिका:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल मीडिया को बढ़ावा देने के लिए विशेष अधिकार अधिनियम के तहत कई नीतिगत फैसले लिए हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सत्य और सटीक जानकारी प्रसारित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

3. डिजिटल मीडिया का भविष्य:

डिजिटल मीडिया आज के दौर में सबसे तेज और प्रभावी माध्यम बन चुका है।

चुनौतियां और समाधान:

1. शोषण और दुर्व्यवहार:

कई जिलों में जिला जनसंपर्क अधिकारी (DPRO) या जिला सूचना अधिकारी डिजिटल मीडिया के पत्रकारों के PRO लेटर जमा करने से इनकार कर देते हैं।

पुलिस विभाग द्वारा डिजिटल पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार के मामले भी सामने आए हैं।

ऐसा करना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 166 (लोक सेवक द्वारा कानून की अवहेलना) और धारा 500 (मानहानि) के अंतर्गत दंडनीय अपराध है।

2. कानूनी कार्रवाई:

यदि कोई अधिकारी डिजिटल पत्रकारों का अपमान करता है, तो पत्रकार मानवाधिकार आयोग, सूचना आयोग, और संबंधित मंत्रालय से शिकायत कर सकते हैं।

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकती है।

ईएसओ पत्रकार महासंघ के प्रयास:

ईएसओ पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रवीण सिंह जी के प्रयासों से डिजिटल मीडिया पत्रकारों को उनके अधिकारों का एहसास हुआ है। श्री सिंह ने प्रधानमंत्री और मंत्रालय के अधिकारियों को पत्र लिखकर डिजिटल पत्रकारों के साथ हो रहे शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। उनके प्रयासों से:

1. डिजिटल मीडिया को सूचना प्रसारण मंत्रालय की वेबसाइट पर स्थान मिला।

2. नए भारत के नए पत्रकारों के हित में महत्वपूर्ण नीतियां बनीं।

जागरूकता संदेश:

डिजिटल मीडिया के पत्रकार देश की आवाज़ हैं। यदि आपके अधिकारों का हनन होता है, तो:

जिला सूचना अधिकारी और संबंधित मंत्रालय में अपनी शिकायत दर्ज कराएं।

कानूनी सलाह लें और आवश्यकता पड़ने पर अदालत का सहारा लें।

ईमानदारी और सच्चाई से अपनी जिम्मेदारी निभाएं।

“डिजिटल मीडिया: सत्य और सटीकता की शक्ति। आइए, इसे संरक्षित करें और नए भारत के निर्माण में योगदान दें।”

सतर्क रहें, संगठित रहें, और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं।

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